(शायरी)
(आज फिर दिल पर किसी ने दस्तक दी है,
मेरे ज़हन ने फिर न सुनने की हिदायत दी है।)
आज मेरे वर्षों से उदास पड़ा दिल ने खुशियां दी है,
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जटाओ से है जल प्रवाह जिनके मात् गंग का ; गले मे है जिनके हार विष भुजंग का ; डमट डमट डमट डमरू कह रहा शिवय शिवम् तरल अनल गगन पवन धरा धरा शिवा� read more >>