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देश सेवा का प्रण-यदि में शहीद हो भी जाऊँ
मैं छोड़कर जा रहा हूँ अपना गाँव संभाल के रखना मेरे गाँव वासी मैं जरूर लौटकर आऊँगा एक दिन बनकर देश का सच्चा सिपाही यदि में शहीद हो भी ज�
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ए-गुईया रे झूलना ए-झूल-गुईया रे ओ मोरे गुईया रे
ए-गुईया- रे गुईया रे ओ मोरे गुईया रे, झूलना ए-झूल- गुईया रे ओ मोर गुईया रे,, चाल लहकदार नजर- ए- झूलेला ओ मोर गुईया रे, रूप रंग तोर दिल- बस�
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सफ़ेद पोश-आये हैं कुछ सफेद पोश आज हमारे गांव में
सफ़ेद पोश आये हैं कुछ सफेद पोश आज हमारे गांव में मांग रहे लोटे में पानी बैठे नीम के छांव में एक नहीं हैं दो नहीं हैं दस के दस हैं साथ �
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मेहमान-बिन बुलाएं मेहमानों से बचाएं अपनी जान
बिन बुलाएं मेहमानों से बचाएं अपनी जान, मृत्यु बीमारी कर्ज़ा चिंता दुश्मनी बेरोजगारी गरीबी आदि है इनका नाम। ऊपर वाले का सुबह शाम नही�
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सफलता मेहनत करने वालों को मिलती है - शांति से हाथ पे हाथ रखके बैठने वालो को नहीं
1 फूलों फूलने पे सुंगध देती है मुरझाने पे नहीं सफलता मेहनत करने वालों को मिलती है - शांति से हाथ पे हाथ रखके बैठने वालो को नहीं 2 तुम्हे�
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क्षत्रिय धर्म -के विपरीत आचरण करते हैं वे मर्यादित क्षत्रिय नही हैं
श्री कृष्ण कहते हैं, हे अर्जुन -तू धर्म युक्त संग्राम को नही करेगा,तो स्वधर्म व कीर्ति को त्याग कर पाप को प्राप्त होगा,इनसे जाना जाता है
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कह ना पाये-कहने का मौका तो दिया था तुने मगर
कहने का मौका तो दिया था तुने मगर हम कुछ कह ना पाये। ये उलक्षन है अपनी ही अब किसे क्या समझाये। कहना था तुमसे बहुत कुछ अफसोस हम कुछ कह ना�
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अंदाज वही है-डरते तो हम कल भी नहीं थे
डरते तो हम कल भी नहीं थे और आज भी नहीं है बस कुछ जिम्मेदारियां हैं साहब वरना तो अंदाज वही है ज्योति यादव के कलम से ✍️
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क्या करूं मैं इस नींद का-यह आती बहुत है
क्या करूं मैं इस नींद का यह आती बहुत है चलो आती तो आती पर आजमाती बहुत है हर रोज सोचती हूं आज जी भरकर सोऊंगी पर अफसोस ख्वाब सोने नहीं द�
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मैं झुरनिया झारखंड की पठारण-मोरनी सम छमछम नाचूं गाऊं
मैं झुरनिया- झारखंड की हूं पठारण, मैं झुरनिया- मैं पठारी हूं पठारण,, मैं झुरनिया हूं- झाड़ियों की बुलबुल मैं, नाचूं- मैं गाऊं मोरनी �
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सबके कर्मों का अधिष्ठता साक्षी-चेतन वह सर्वज्ञ परमात्मा तुम्हारे स्वरूप में
प्राणियों में वह- रहे प्राण के रूप में, अंतर्यामी- जीवों में आत्मा रूप में,, सबके कर्मों का- अधिष्ठता साक्षी परमात्मा, चेतन वह- सर्�
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जीत का कोई मूल्य नहीं
सुख में दीप जले जैसे दुख में बात नहीं हम कैसे रोके उसको जिसके साथ नहीं। आंगन की अंगड़ाई में दिल की इस गहराई में मत इतना गुबार भरो जिस
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