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1 .प्रेम या मुहब्बते देखकर करना कही थोखा न हो जाए 2 .दोस्ती उसी से करना जो साथ देने का वादा करें . किसी भी कार्यो को करने में -पिन्टु कुमा read more >>
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" कौरव पाया जीत कर,पांडव पर अधिकार। हार गए तिय द्रोपदी, और हुआ लाचार।। चीर हरण करने लगा,भरी स read more >>
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" धीरे धीरे एक दिन,होगा बम विस्फोट। बढ़ता यहां अधर्म से,अच्छों में भी खोट।। धीरे धीरे एक दि� read more >>
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" अपने मन की बात से,जीतें यह संसार। गौरव बन कर देश का,सबको दें अधिकार।। अपने मन की बात को,नही� read more >>
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" एक भरोसा राम का,जो रहते हैं साथ। हर विपदा से ले बचा,सिर पर रख वो हाथ।। एक भरोसा राम का,जिससे read more >>
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" ऐसी कैसी जिन्दगी,रहती है नाराज। दूर ज्ञान से यह रहे,गलत करे हर काज।। ऐसी कैसी जिन्दगी,रहता read more >>
#विधा:_मुक्तक छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" हँसी और मुस्कान से,करिए नित आदाब। पाएं दुआ असीम तब,रहे शक्ल पर आब। औरों को भी कर सरस,लिए ह� read more >>
#विधा:_रोला छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" हँसी और मुस्कान,रहे जिसका गर साथी। भय रहता है दूर,मिले सदगुरु की थाथी।। पाएं तब सब ज्ञान,बन� read more >>
#विधा:_कुंडलिया छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" आशिक मेरे हैं सभी,बनकर अदभुत सोम। हँसी और मुस्कान से,खिल जाता है रोम।। खिल जाता है रोम,� read more >>
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" हँसी और मुस्कान से,घायल करती नाज। दीवाना मैं जो बना,और लुटा दूं राज।। हँसी और मुस्कान से,ख� read more >>
बेशक हुआ इस हुस्न पर दीदार आपका चाहत की हमारी वह तलब गार हो गए।। जीना था जिन्हें बिन नाम मोहब्बत के वो खुद्दार भी इश्क के बीमार हो गए।। read more >>
ज़ख्म गहरा है सब्र से काम लेना है। ज़माने को अपनी चाहत में ढाल लेना है।। इंतहा होगा हमारे इश्क का आखिर कब तक। जुंवा को बंद रखो आंखों से read more >>
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