एक लड़की रोज शाम को 5:30 बजे पार्क में आकर वहीं एक बेंच पर बैठ जाती और उसके ठीक 10मिनट बाद एक लड़का भी उसी के पास आकर बैठ जाता
वहां से दो बेंच read more >>
(दोहा छंद)
आदत से मजबूर जो, उस पर चढ़े न रंग।
वो अपना ही चाल चल, करे काम को भंग।।
आदत से मजबूर जो,सोचे कभी न खास।
थोड़े में झूमे सदा,करके द� read more >>
"कभी क़ासिम तो कभी गजनी से भिड़ा ठाकुर !
हार तो तय थी...पर लड़ा ठाकुर !
हारना ही था उसे , वो अकेला जो लड़ा था ,
क्या जन्मभूमि ये तुम्हारी नही� read more >>