चलो बढ़ते चलो........
चलो बढ़ते चलो तुम राह पथिक,
कही गिर भी गए तो संभल जाना,
मंज़िल को तुम्हे गर पाना है,
तो निरंतर चलते चले जाना ।
पग पग में म� read more >>
#विधा:_दोहा छंद
#"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत"
मुझ पर यह अहसान कर, मुझ से कर ले प्यार।
और करो अधिकार भी, बनकर यूँ दिलदार।।
मन से मन को मेल क� read more >>