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कफ्फू चौहान बोल रहा हूँ
""हर प्रेम सुधा बरसाने को मै सुर सरिता का आवाहन करू। हे उपगढ़ पति , हे गढ़ नरेश समर्पण कफ्फू चौहान भरू।"" उत्तराखंड की भूमि बड़े-बड़े �
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वो शिव ही तो अनंत है!
वो शिव ही तो अनंत है वो निरंकार ओंकार है सृष्टि का जहां अंत है वहा से शिव प्रारम्भ है गंगा है जिसके शिस पर भुजंग शोभे कंठ में वही तो शि
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गुलाब
ऐ गुलाब तू क्यों अब इन पन्नों में डरा सहमा छुपा हुआ है, वो भी एक जमाना था जब तू मेरी प्रेरणा हुआ करता था।। ✍️प्रदीप सिंह ग्वल्या
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जिंदगी जीने की ...... Neetesh Shakya
जिंदगी जीने की मेरी ख्वाहिश थी, अपने छोड़कर गैरों पर चाहत थी| गैरों के चक्कर में अपनों को भूला बैठे, जब अपनों ने दिया सहारा तब गैर रूला
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फुर्सत
अक्सर वह यह कहा करते हैं, के उनको इक पल की भी फुर्सत नहीं पर जाने क्यों हमें यह लगता है के हमसे उनको कोई मतलब ही नहीं।
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मेहमान वनके आए थे कभी
मेहमान वनके आए थे कभी अब याद वनके ही रह गये हो, मिलों दूर के ओ रहने वाले तुम अब ख्वाब वनके ही रह गये हो।
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हिंदी दिवस
मैं खुले गगन का पंछी बनकर आधार धरूँगा हिंदी में। मै रजत रश्मि का सूरज बनकर चमक उठूंगा हिंदी में। जीवन की जो आशा हैं उस आशा में परिभा�
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तेरे गिरने में तेरी हार नहीं
उठाना गिरना प्राकृतिक स्वभाव है जैसे सुबह ओस गिरती है दोपहर में धूप गिरती है शाम को छांव गिरती है इस तरह जीवन में गिरने उठने का
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श्रम देवता की पूजा करें...
एक बार स्वर्ग के देवता धरती पर विचरण करने आए|उन्हें आशा थी कि धरती के निवासी उनका विपुल स्वागत करेंगे ।उन दिनों खेतों में अनाज के पौधे �
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इसने बननी थी द्वारिका
क्या कभी आपने ये सोचा कि असली में इस द्वाराहाट ने श्री कृष्ण की द्वारिका बननी थी, लेकिन बनते - बनते रह गया ऐसा क्या होगा इस द्वाराहाट मे
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मेरी मांग विधाता से
मेरी मांग विधाता से हे विधाता आज तुझसे खिल चुकी मेरी भावना। आज तुझसे कह रहा हूं मांगा मैंने कामना। मुझको ये वरदान दे दो सादगी का मान
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मेरी ऊर्जा मेरी खुशी में
अपनी ऊर्जा अपनी खुशी में खर्च करो क्योंकि खुशी से ही रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है अपनी सभी समस्याओं से स्वंय निपटो जितना अधिक समस�
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