हम वो हैं, जो हमें हमारी सोच ने बनाया है। इसलिए, इस बात का ध्यान रखिए कि आप क्या सोचते हैं? शब्द गौण हैं। विचार रहते हैं, वे दूर तक यात्रा read more >>
एक शकुन था, अब वो ना रहा
एक जनून था, अब वो ना रहा
हम जलते रहे चिराग की तरहा
हमारा रूतबा, अब वो ना रहा
इस चका-चोंद जिन्दगी मे
हमारा फलसफा, अ� read more >>
मैं ये नहीं कहती हूँ कि बाकी भाषाएँ नेक नहीं
अंग्रेजी बोलना अच्छा है पर हिन्दी त्यागना ठीक नहीं
—त्रिशिका श्रीवास्तव ‘धरा’ read more >>