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Writer by iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
अब चाहत नही रहा इंसान बनना क्योंकि लोगों ने ही मुझे मजबूर कर दिया है।शैतान बनने पर।
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Writer by iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
मैं जब दुनिया में रहा ही नहीं तो मेरी यादों क्यों याद कर रहे हो।
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Writer by iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
ऐसा न मारो के लोग चार कंधो पर तो ले जाए पर रोना वाला चार लोग भी न हो।
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Writer by iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
आज मैं बहुत ही बुरा हूं। अच्छा साबित करने के वक्त लगेगा।
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Writer by iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
अब वफा भी उसी कीतलाश में है, जो वफा नही करता है।
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Writer by iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
अपने ही ख्वाहिश को पूराकरने के लिए जो मोहब्बतकी जाए,उससे वफा नही मिलती।
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Writer by iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
मोहब्बत में उम्मीद लगाए बैठे हुए थे लोग मिल ही जायेगी,लेकिन किस्मत शिकस्त दे गई।
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Writer by iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
शुक्र है मरने के बाद ही जन्नत मिलती है,अगर जिंदे में मिल जाती तो लोग आग लगा देते।
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Writer by iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
लोगो को जब मोहब्बत होती है तो बादशाह जैसी मगरुर होने लगता है,लेकिन बादशाह से फकीर होने में देर नहीं लगती।
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Writer by iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
पैसे ने ही वफा खत्म कर दी है लोगो की,वरना मोहब्बत तो एक वेबह से भी की जाती है।
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Writer by iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
कहां तक वफा करू मैं, क्योंकि अब लोग भी पैसों को वफा समझ ने लगे है।
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Writer by iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
अब इंसान का कोई इज्जत नही रहा,क्योंकि अब इंसानों से ज्यादा पैसों का इज्जत होने लगा है।
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