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तुम्हें पानी पी लेने से दिक्कत नहीं था शाहब दिक्कत तो तुम्हें मेरी जात से थी और उस की कीमत जान दे कर चुकानी पड़ी।"जालोर? read more >>
क्या कसूर था मेरा प्यास ही तो बुझाई थी मालूम नही था एक ग्लास पानी की कीमत जान दे कर चुकानी पड़ेगी। जालोर read more >>
हमलोग थर्ड क्लास के लोग है शाहब पेट भरने के लिए भी रोटी गिन के खानी पड़ती है।। read more >>
मोहब्बत बांटों शाहब भले ही वफा न मिले।लेकिन जन्नत जरूर मिल जायेगी। read more >>
मोहम्मद के नाम पर मोहब्बत बांटने के बजाए नफरत का दरबार लगा हुआ है। read more >>
हक की आवाज़ के लिए अब जान भी चला जाए तो क्या फर्क पर जायेगा,क्योंकि यहां हक सभी को चाहिए लेकिन बोलना कोई नही चाहता। read more >>
सब के नाम के पीछे टाइटल मोहम्मद अली हुसैन लगा हुआ है।लेकिन व्यहवार फिरौन के जैसा कर रखा है। read more >>
मोहब्बत हमेशा खुशी तो नही देती है। लेकिन चन्द मिनट की खुशी के लिए जिंदगी बंधक बन जाती है। read more >>
दूसरे के स्टेटस के पीछे भागने वाले लोग अपने स्टेटस को डिसेबल कर रखे है। read more >>
कविता- यदुवंशम: योगेश्वर श्रीकृष्ण हे! द्वारकाधीश जन्मदिन की आपको बधाई आनंद,मंगल है पूरे जगत में झूम रहे अनुयायी निकाल कर रैली बन गो� read more >>
आते..जाते..राहों में मैं अक्सर..देखता हूं भीड़ का एक..मेला..! और नज़र आता है.. हर..एक शख़्स...अकेला..!! जिनके आंखों में.... चमकती रहती है...तनहाई read more >>
क्या कसूर था उस ननी जान छीन लिया सब कुछ...... बडा दि उस लाचार की ओर नौ महीने की प्रसव पीड़ा क्या कसूर था उस ननी जान नहीं जानता वह क्या धर्म.. read more >>
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