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हर घड़ी इंतजार है तेरा मोहन
हर घड़ी इंतजार है तेरा मोहन, तेरी झलक पाने के लिए बेताब हैं दिल मोहन, सताती है तेरी मुरली की तान मोहन। जय श्री कृष्णा
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☝ सर्व स्वत्तंत्र भावों भवान्.... ✍️
1 हैं लाख चाहत्तें ले कर के, स्वाधिनत्ता पथ हो के आज़ाद चलें! अब चलो चले कर मन स्वत्तंत्र, बनने स्वत्तंत्र निष्ठा: चलें!! 2
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इस कदर
ऐ जिंदगी तुझको मिली इसे इस कदर न खोओ सनम हम रहे या न रहे हमारी यादों को अपने दिल से न मिटाओं सनम। धन्यवाद
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तुम्हें याद नहीं
क्या तुम्हें याद नहीं कितने बिताए लम्हें साथ छोड़ के तुम चले गए ऐसे मेरा हाथ अब पास मेरे कुछ नहीं सब ले गए तुम अपने साथ। धन्यवाद
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सबक
क्या सबक मिली तुमसे मुझे जिंदगी भर याद रहेगा अब ए गलती दुबारा न मेरे साथ होगा। धन्यवाद
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निभाने का वादा
जिंदगी भर साथ निभाने का वादा कर ऎसे मुंह मोड़ा अभी तो कदम बढ़ाए ही थें की कदम पीछे मोड़ लिए। धन्यवाद
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वीर
कुछ गोलियां लगी थी पैरों में फिर भी सोच थी कि रुकना कहा ज़रूरी है घुटने अभी ज़मीन पर गिरे नही देश भक्ति अभी अधूरी है वो धरती कितनी रो�
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🤗 गर्दिश के सित्तारें 👌
है मिली रौशनी अंधेरों को, बन सुर्य प्रभा का ऊदय हुआ! बन दिनकर और दिवाकर स्पनें त्तेज़वान, अपना वक्त सत्तीरों कि लड़ीयों सा!!
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जिंदगी एक पहेली हैं
जिंदगी एक पहेली है, आसानी से समझ नहीं आती, गहराई तक जाना पड़ता है, तब कुछ सुलझ हैं जाती।
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पूज्य कबीर द्वारा दिए गए यह दो है उनकी अमृतवाणी सृष्टि रचीत है
धर्मदास यह जग बोराना। कोई न जाने पद निरवाना।। यही कारण मैं कथा पसारा। जग से कईयों राम नियारा।। यही ज्ञान जगजीवन सुनाओ। सब जीवो का भर�
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उम्र गुजरी है
उम्र गुजरी है मेरी तुझको ,मोहब्बत में यंकी दिलाते हुए पर क्यों तुझको न आया, कभी यंकी मेरे लिए। धन्यवाद
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सात
सात फेरों के सातों वचन हम निभाएगें सातों जन्म जिस्म में जान हो जब तक हम रहेगें तुम्हारे सनम। धन्यवाद
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