Yogesh Yadav 30 Mar 2023 कविताएँ अन्य 51685 0 Hindi :: हिंदी
कुछ गोलियां लगी थी पैरों में फिर भी सोच थी कि रुकना कहा ज़रूरी है घुटने अभी ज़मीन पर गिरे नही देश भक्ति अभी अधूरी है वो धरती कितनी रोई होगी जिसपे प्राण किसी ने झोक दिया मोह माया सब त्याग के जिसने एक एक गोली खुद पे रोक लिया भीग रही थी लहू से वर्दी खून से लथपथ शरीर था उसका अब सूख चुकी है आँखे माँ की कभी मिल न सकेगा बेटा जिसका हाथ था माँ का माथे पर जब छोड़ रहा था घर वो अपना एक सोच थी कि वीर जवान कहलायेंगे और पूरा करेगा बाप का सपना