में पतझड का मौसम हू तुम बारिश बन बरस जाओ
मे लिखता रहू उम्र भर , तुम कविता बन उभर आओ
भले रुठे हो शब्द मेरे, तुम यु दिल की बात समझ जाओ
मेरी ज read more >>
आज की युवा पीढ़ी खुद को भूल रही है ।
प्रेम की झूठी परिभाषा में खुद को तोल रही है ।
निज जीवन के कर्तव्यों को भूल गई है ,मात पिता के बलिदानो � read more >>
इस दिवाली ..
चलो हम सब भी एक दीप जलाते है ,
अपने साथ किसी गरीब की थाली में भी मिष्ठान सजाते है
चलो किसी गरीब की दुकान से दिवाली का सामान ल� read more >>