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Guru hai to
*गुरु है तो* गुरु है तो संसार है गुरु है तो प्यार है घने अंधकार में भी दीपक का प्रकाश है मन का विश्वास है दिल का एहसास है सुंदर मार्ग �
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बच्चों के हाथो में किताब और कलम दीजिए
इन हाथों से मोबाइल को हटाकर , बच्चों के हाथों में किताब और कलम दीजिए ।
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पितरों का सम्मान करें
*कविता* *पितरों का सम्मान करें* पन्द्रह दिन के पितृपक्ष में पितर हमारे आते हैं देख हमें सम्पन्न सुखी वे वापस हो जाते हैं।। श्रद
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जरूरी तो नहीं
जरूरी तो नहीं। हर जाम को महफ़िल मिले, हर राही को मंज़िल मिले। हर कश्ती को किनारा मिले, खोया अवसर दुबारा मिले। जरूरी तो नहीं। हर नदी
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चटोरा मन
दूध कटोरा छोड़, कोल्ड ड्रिंक लेते लपक। चाय सुबह नहीं मिली, मानों धरती गई दरक। नशेबाज़ को नशा नहीं मिले, जाता हड़क। मद का प्याला दिख�
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विघ्नहर्ता की बिदाई
*कविता* *विघ्नहर्ता की बिदाई* चतुर्थी के दिन बप्पा को घर में लाए थे ढोल धमाके खूब बजे विघ्नहर्ता जब घर आये थे।। बप्पा के आने स�
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अब तुझे रोने न दूँगा।
अब तुझे रोने न दूँगा। छोड़ दे जग साथ तेरा दुर्दिनों में हाथ तेरा, दीन, निर्बल, बेसहारा मैं तुझे होने न दूँगा। अब तुझे रोने न दूँगा। र�
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⏰ नर हो! न,निराश रहो....🌄
नर हो! न, निराश रहो, मन से, ईक नया सबेरा आएगा! सृष्टी को दिप्त्त कर सूर्यवान, हर अंधकार मिट जाएगा!! त्तप्त्ति राहें संघर्षों �
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ज़ख्म का शोर..
**"ज़ख्म का शोर"** ये शहर के कोने, ये गलियों का अंधेरा, जहाँ इंसानियत रोज़ मरती है, बिखरता है बसेरा, बलात्कार की खबर, हत्या की दास्तान, र�
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नक्षत्रा
कधी चंद्राकडे पाहतो, कधी पाहतो तिला ती म्हणे काय मिळणार लीहिण्या करिता माझ्यात तुला . फारसे काही नाही तुझे केस छान आहे , कित्तेकांचे
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कलयुग के रंग
लगेगी कलयुग की फटकार, मचेगा जग में हाहाकार गाय, खूंटा तुड़वाकर भागेगी, निज पति संग रास नहीं, नारी पर पुरुष से नैन लड़ाएगी। औरों की �
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🇮🇳 उम्मिदों कि रौशनी... ✍️
ऊदय प्रत्ता: अधिन्स्त्त किरण ! और अस्त्त - व्यस्त्त मज़धारों में!! है! चम़क रही उम्मिदों कि रौशनी, हर नयें - नयें अवत्तारों मे!!
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