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चटोरा मन

Santosh kumar koli ' अकेला' 17 Sep 2024 कविताएँ समाजिक चटोरा मन 29865 0 Hindi :: हिंदी

दूध कटोरा छोड़, 
कोल्ड ड्रिंक लेते लपक। 
चाय सुबह नहीं मिली, 
मानों धरती गई दरक। 
नशेबाज़ को नशा नहीं मिले, 
जाता हड़क। 
मद का प्याला दिखते ही, 
तन- मन जाता थिरक। 
घर का टिफ़िन छोड़, 
भाएं बर्गर, पिज्जा। 
सात्विक भोजन छोड़, 
खाएं अस्थि, मज्जा। 
नैसर्गिक सुंदरता छोड़, 
भाए ब्यूटी पार्लर सज्जा। 
दैहिक खुलापन चाहिए, 
बेच आत्मिक लज्जा। 
थाली को दूर सरका, 
मन करे चाटने को दोना। 
मेहनत को नहीं करता मन, 
चाहिए गड़ा सोना। 
आम लगे रसीला, 
मन करे आक बोना। 
त्याग को त्यागकर, 
रिश्तों को स्वार्थ धागे में पिरोना।

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