मेरा चाँद... (शीर्षक)
उस मुडेर पर ,पता नहीं
क्यों रुका है, मेरा चाँद,
क्या उसको घर का पता नही,
क्या अपनों के दिल दुखाने की
खता तो नहीं?
कभी � read more >>
जलती आग के सरारे हुआ करते थे,
कभी तो हम भी यूँ कुँवारे हुआ करते थे।
थोड़े नमकीन और करारे हुआ करते थे,
कभी तो हम भी यूँ कुँवारे हुआ करते थ� read more >>
रंगों की अपनी है एक अलग पहचान, करता नहीं कोई इन का अपमान,
हर बात किस्सों में आती है इनकी याद,
कभी-कभी तो यह बन जाते हैं हर किसी के भी विवा� read more >>