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मिलन
एक छोटी सी बात है! तुम्हें आज बता दूं क्या!! जज्बातों का सैलाब हो तुम! दिल मे तुम्हें बसा लूँ क्या!! कुछ देर बैठो पास मे साथ मे! �
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शीर्षक (अभी बाकी है।)
शीर्षक (अभी बाकी है) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) सांसे रुकने को है,पर कुछ काम अभी बाकी है। यमराज से बोल देना थोड़ा रुक कर आये। क्योंकि
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सावन सुन्दरी
कविता का शीर्षक- सावन सुन्दरी आ गया सावन का मधुमास पल, नारी की लहराने लगी हरित चुनरी। सज-धज कर सोलह श्रृंगार करके, मन-मगन नाच रही सावन �
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गुरु ज्ञान का सागर
कविता का शीर्षक- गुरु ज्ञान का सागर वंदन है मेरे गुरु का, अभिनंदन है गुरु का। गुरु ज्ञान का सागर, वाणी चंदन है गुरु का।। भवसागर पार कर�
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लक्ष्य भेद
कविता- लक्ष्य भेद चाहे बनी हो दीवारें लोहे की, जो हो चाहे अकाट्य अभेद। मेरी प्रतिज्ञा दृढ़ संकल्पित है, एक दिन करूंगा लक्ष्य भेद।। �
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🙌 प्रार्थना 👏
दो दान दया का दया निधे:, हम शान आपका गाऐंगें! दो ज्ञान अचल हे! महा ऋषी, गुणगाण आपका गाऐंगें!! है दया धर्म का मान रहा, भक्ती -
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🙏 हे! राम 👌
चाहत को मिलें आशां कि किरण, ज्यों मिलें प्रभा से अंधकार! त्यों ज्ञान ल्लक से मिलती हैं, होता कल्याण का सृजनहार!! हे! राम – राम, ह
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मेरी जिंदगी
मेरे पहले कि दास्तान, अब बदली सी लगने लगी हैं। जिस शाम तन्हाई सताती, वह फूलों से महकने लगी हैं। जहाँ अकेले तारे गिनना मुश्किल था, अब यह
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एक नई शुरुआत
चलो आज फिर एक नई शुरुआत करते हैं कुछ बातें हो गई है पुरानी आज हम मिलकर एक नई बात करते है जब कोई दिल दु:खाए उस दुःख को दूर करने की बात क�
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वृक्ष हमारे सच्चे मित्र
कविता का शीर्षक- वृक्ष हमारे सच्चे मित्र हे! मानव तुम मुझे मत काटो, बदन को टुकड़ों में मत बांटो। महसूस करता हूं दुःख दर्दों को, कोमल श�
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अतीत को खुद से अलग रखें
अतीत को खुद से अलग रखो जो मिल रहा है जीवन में सबक रखो हर कोई यहां नसीहत सलाह का ज्ञानी है तुम बस ख़ुद पर ही अपनी नज़र रखो उजाले से तो म�
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फिर कविता में प्रभात आए,,।।
उम्र की सीमा नहीं ,है ,किस पार जाना,। कविता कहती है,सफर वहाँ तय हो, सन्नाटा रहित पनघट जिधर हो,। तब कहीं छलके भी तो ,यह आंखों का नीर , व्यर्थ
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