बेटी
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बेटी तु जो समजे पाप
तो यह तेरे नजरो का दोष भाया
बेटी है एक कोहनुर हिरा
प्रेम का अपुर्व सागर गहरा
बेटी तु जो समजे पाप.....।।धृ।।
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कुछ तो काला दाल में, सूरत पर है हर्ष।
बात करें वह गर्व में, फिर भी हो उत्कर्ष।।
कुछ तो काला दाल में,मिलता मुझ से रोज।
करता बातें खूब ही, � read more >>
मेरी एक दोस्त हैं जो इन दिनों ससुराल में है ,जो फूलों को छोटेपन से ही सींच -सींच कर बड़ा करती हैं ,और जब उनके खिलने की बारी आती है, तब तक उनक� read more >>