घुट- घुट के जी रहा हूँ,
घूँट- घूँट पी रहा हूँ।
ये सितम का कहर,
तेरे इश्क का जहर।
लुट- लुट के जी रहा हूँ,
घूँट - घूँट पी रहा हूँ।।
टुकड़े- � read more >>
न जाने !मन में कितनी उलझन है! इन उलझनों को सुलझाने का! कोई एक रास्ता तो दो!
कहनी है बहुत कुछ तुमसे !
कभी मेरी भी बातों को
सुनने को एक शाम त� read more >>