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(मुक्तक छंद) सबके दाता राम हैं, हृदय बसा लें राम। सब प्रभु ही सम्हाल दें, करें सरल हर काम। गम को हम तूं मार दें,हरदम रखें जुगार_ जन्म मरण � read more >>
(दोहा छंद) रखें सुरक्षित आप को,संयम में हो चाल। कटे आनन्द में सदा, जीवन हो खुशहाल।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर( read more >>
(मुक्तक छंद) प्रभुता के संदेश से, लोगों में है हर्ष। आपस में सब बात कर, भूल गए हैं कर्ष। जज्बा सब ही पूर्ण हों,चाहे हों जो राह_ बच्चा बच्च read more >>
(दोहा छंद) करें प्रतिज्ञा आज से,बुरी अमल को त्याग। सुन्दर सुन्दर गुण रखें,जीवन में हो राग।। क्रोध भाव को दूर रख,दया भाव हो साथ। करें प� read more >>
(दोहा छंद) पावन विचार से मिले,दुनिया की हर हर्ष। खुशियों में जीवन कटे, नित ही हों उत्कर्ष।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_सम read more >>
संबंधों का कोई मोल नहीं है सभी के अपने मापदंड हैं ! सभी ने अपने मापदंड बदले! सबने खोई है संबंधों की प्रासंगिकता ! छोड़कर पुरानी परंपरा � read more >>
(दोहा छंद) प्रेम जगत का सार है, जन जन में हो प्यार। खुशियों में जीवन कटे, दुनिया हो गुलजार।। प्रेम जगत का सार है,इससे ही संसार। मनुज जन् read more >>
किस-किस संग रिश्ते को निभाना है यह अपने दिल को अब समझाना है क्यों? उन रिश्तो तो संग में रहूं जिनको मेरी परवाह नहीं? कौन है ? अपना कौन पर� read more >>
(दोहा छंद) करें मनुज द्रुत फैसला, सदा रखें विश्वास। धैर्यवान बनकर रहें,छोड़ें कभी न आस।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस� read more >>
(दोहा छंद) यूं ही हृदय उदास है, दिल में है जो दर्द। किसे कहूं अब यार मैं, मौसम भी है सर्द।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्� read more >>
(मुक्तक छंद) हमें मुहब्बत हो गया, तुझ से ही ओ यार। यादों में तुम ही रहें, मेरे दिल हकदार। तुझ में ही है जिन्दगी, तुझ में ही दिल जान_ सबकुछ read more >>
(दोहा छंद) महफ़िल में वह भी मिली, सुर्ख़ चेहरा ख़ास। नज़र जिगर सूरत बसी,मिटी युगों की प्यास।। खान बात सब अति चली,जुड़ा ह्रदय की तार। स� read more >>
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