(मुक्तक छंद)
सबके दाता राम हैं, हृदय बसा लें राम।
सब प्रभु ही सम्हाल दें, करें सरल हर काम।
गम को हम तूं मार दें,हरदम रखें जुगार_
जन्म मरण � read more >>
(मुक्तक छंद)
प्रभुता के संदेश से, लोगों में है हर्ष।
आपस में सब बात कर, भूल गए हैं कर्ष।
जज्बा सब ही पूर्ण हों,चाहे हों जो राह_
बच्चा बच्च read more >>
(दोहा छंद)
यूं ही हृदय उदास है, दिल में है जो दर्द।
किसे कहूं अब यार मैं, मौसम भी है सर्द।।
(स्वरचित मौलिक)
संदीप कुमार सिंह✍️
जिला:_समस्� read more >>
(मुक्तक छंद)
हमें मुहब्बत हो गया, तुझ से ही ओ यार।
यादों में तुम ही रहें, मेरे दिल हकदार।
तुझ में ही है जिन्दगी, तुझ में ही दिल जान_
सबकुछ read more >>