हे ! मज़हबी मानव तेरे कितने रूप और रंग
हम समझ ना पाए तेरे जीवन जीने का ढंग ।
आतंक दंगे-फसाद धर्म की आड़ में आखिर अभी कितने,
न जाने इस आग की � read more >>
मेरे मन में वसी कमल निवासिनी, सुबह-शाम तेरा दिददार करती हूं,
मेरे सर पर हाथ रखे रहना, मुझे बीच भंवर में ना डूबोना, मां तुम पर विश्वास करत� read more >>