ये जमाने के लोग सुन लो जरा,
दिल ना दुखाना किसी का मान
लो जरा, दया ही धर्म है,
क्षमा से बड़ा नहीं है दान,
किसी के आंशु पोंछ कर,
उसे हंसा सको read more >>
कोई भी प्राणी कि जब उत्पत्ति होती है, तो उसमें चेतना का समावेश होता है, हम अपनी चेतना को, साक्षात रुप से नहीं देख सकते, लेकिन उसे हम अपनी � read more >>