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दुःखद
बेवफाई-सोचा था तेरी बेवफाई को भुला देगें हम
सोचा था तेरी बेवफाई को भुला देगें हम पर कमबख्त ऐ दिल तुझे भूलने ही नहीं दिया धन्यवाद
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रिश्ता-रिश्ता हमारा ऐसा ना था कि हम उसे रोक सकते
रिश्ता हमारा ऐसा ना था कि हम उसे रोक सकते आवाज भी देते तो किस हक से धन्यवाद
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जब दोष दिल का है-तो तुझपे क्यों दोष लगाए
जब दोष दिल का है तो तुझपे क्यों दोष लगाए ऐ दिल ही था बेवकूफ जो तुझपे आने से ना रोक पाए धन्यवाद
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गमों में इतना डूब गए थें-होंठो की मुस्कुराहट भूल गए
गमों में इतना डूब गए थें कि होंठो की मुस्कुराहट भूल गए हम जहां से निकले थें आज वहीं आ गए हम धन्यवाद
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संभालू कैसे दिलको-तुम बिन सहारा कहा है
संभालू कैसे दिलको, तुम बिन सहारा कहा है बिछड़े जो हम तुमसे, तुम बिन तो मर जाना है
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आंसुओं की कीमत-बाहर तुम्हारे आंसुओं का कोई मोल नहीं
बाहर तुम्हारे आंसुओं का कोई मोल नहीं इसलिए अपने कीमती आंसुं ना बहाना घर के चार दिवारी में जितना चाहे रो लेना पर दरवाजा चेहरे पर हं�
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हजार मिलेगा-दुनियां में तुम पर हंसने वाले
दुनियां में तुम पर हंसने वाले हजार मिलेगा पर कोई तुम्हें हंसाए ऐसा कोई ना मिलेगा धन्यवाद
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जो जख्म देकर- जख्म को भरे वो इंसान कैसा
जो जख्म देकर जख्म को भरे वो इंसान कैसा जो दिल लेकर दिल से खेले वो महबूब कैसा धन्यवाद
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कौन कहता है यहां अपने-अपने होते हैं
कौन कहता है यहां अपने,अपने होते हैं जब खुद की परछाई अपनी नहीं होती तो अपने,अपने कैसे हो सकते हैं धन्यवाद
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आज की दुनियां-जहां किसी को अपना दर्द ना बताना
आज की दुनियां ऐसी है जहां किसी को अपना दर्द ना बताना जिसको भी बताओगे वो ब्याज सहित तुमको वापस लौटाएगा धन्यवाद
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बेरहम हवा-अंदर तक झकझोर देती है
ए बेरहम हवा मुझे अंदर तक झकझोर देती है जब अपने साथ तेरी यादें लेकर आती है तेरी बेरुखी मुझसे सही ना जा रही है कैसे बताऊं क्या दर्द दि
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मेरी मौत के ताक में बैठे हैं दो लोग
कैफ सैफी ने बहुत से शेर और गज़लें कहीं हैं, उन्हीं में से कुछ शायरी और शेर आपके सामने पेश करता हूं। 1• मेरी मौत के ताक में बैठे हैं दो लो�
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