बहुत हार चुकी हूं मैं
कभी - कभी मन करता है
कि ऐसी नींद में सो जाऊं
और कभी उठ ना सकूं मैं
थक चुकी हूं खुद से ही मैं
अब ऐ खामोशी दिल की
सही न� read more >>
डगमगा गई थी कुछ देर के लिए
पर अब संभल गई हूं मैं
जिसके पीछे भाग रही थी
वो एक परछाई है, अब समझ गई हूं मैं
उस रोशनी के पीछे भागी
जिस रोशनी क� read more >>
कोई आगे बढ़ जाता है,
कोई पीछे रह जाता है l
किनारों पर खड़ा रह जाता है कोई,
कोई लहरों के संग बह जाता है l
एक आहट सी, यादों की सरसराहट सी,
दि� read more >>