मैं गंगा हुँ ,
आदि युग से ही मुझे पवित्र माना जाता था |
अदि युग से ही मुझे अमृत के सामान माना जाता
था |
अदि युग से मनुष्य अपने पापो को धोने read more >>
जब जब पड़े कलम के निशान कागज पर ,
सिमट कर आ गया सारा जहान कागज पर,
जमाने वाले मेरे जाने के बाद मुझे समझेंगे ,
छोड़ जाऊंगा अपनी जुबान कागज � read more >>
//...तस्वीर…//
एक आईना ,
जो जैसा दिखता
वैसा ही ,
तस्वीर बनाता सबकी…!
मगर ,
जब टूट जाता है
तब ,
नहीं बना पाता
खुद अपनी….!
चिन्ता नेताम &rd read more >>