कविता = ( उदर कुंड )
उदर कुंड में क्यों धधकाई !
भूख की यह प्रचंड ज्वाला !
सब कुछ हुआ सुहा मेरा !
किस -‌ किस का दूं हवाला !
बस कश्मकश रोटी की !
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छूत - अछूत का पता नहीं ,
न मित्र ने मुझे सिखाया ,
उस दो बूंद - छूत पानी ने ,
मुझे मौत के गले मिलाया ।
मुझे पता नहीं था .................
मुझे पता न� read more >>