ढलती उम्र का हर मंजर नया सा है,
कल जो जवां था, आज तनहा सा है।
आँखों में अब भी ख्वाब जिंदा हैं,
पर पलकों पर बोझ थोड़ा ज्यादा सा है।
कदम जो क� read more >>
उठो चलो अब दाव दो,
ये शंकनाद हो चला,
ये सूर्य भी है बोलता,
ऐसे जीतोगें कैसे भला ???
खिली धूप इस दोपहरी की,
अब सूरज सिर पर आ गया,
उठो चलो दौड� read more >>
समाज वह जगह है जहाँ हम सब साथ रहते हैं, एक-दूसरे की मदद करते हैं और मिल-जुलकर जीवन जीते हैं। अगर समाज अच्छा होगा, तो हर कोई सुखी रहेगा।
स� read more >>