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आज के दिन को हम मातृ दिवस के रूप में मनाते है ताकि हमें जन्म देने वाली माता को सम्मान दे सकें, हर कोई अपनी माता से प्यार करता है हमारी संस read more >>
पसीने की क़ीमत, किसने आंकी? हाथ कुदाली, सिर पर परात, दिखती श्रम की झांकी। पसीने से ही, धरती का दामन पसीजता है। चोटी से एड़ी का पसीना, धरा � read more >>
# सपने # अचेतन मन की बातों का संग्रह ही सपने होते हैं। चेतन मन की भावनाओं का परिवर्तन सपने होते हैं ।। सपने तो सपने होते हैं सपने भी स� read more >>
ममता दुखदायी न हो। सोच पिता को अभिनय करना पड़ता, एक पाषाण हृदय अपनाना पड़ता। माता है ममता की मूरत, वही पिता सत्य की सूरत। सुंदर अहसास इ� read more >>
शीर्षक- मैं बदल रहा हूं शिक्षित से अच्छा अनपढ़ था फिर भी शिक्षित से बढ़कर था अपने अपनों का अपनापन सुशीतल मधुर सुधाकर था अब अनपढ़ स� read more >>
चुका उधार पेड़ों से धरती का कर श्रृंगार जीवन पथ मिला ताल से ताल रुकना मत ये संध्या लाली झिलमिल चूनर आभा निराली read more >>
मैं उस देश का नागरिक हूं जनाब,जहां बलातकारी पुरुष होता हैं और इज्जत स्त्री की जाती हैं जह ,हरण रावण करता है, और अग्नि परिक्षा सिता की हो� read more >>
** क्या दिया जिंदगी ने ** हम जिंदगी से अपनी कुछ तो बात कर लें । क्या दिया जिंदगी ने इसका हिसाब कर लें ।। बचपन के दोस्तों की यादों को हम read more >>
बस अब गीत नहीं लिखने हैं- """”"""""""""""""""""""""""""""""" - एक गीत आपकी समीक्षार्थ- read more >>
अंधेरो की दुनीया उसमे हम अपनी मँजील ढुँडने चले,नही कोई रासता नही कोई अपना, हम अनजान अपनी मँजील ढुँडने चले। जो देखे हे सपने जो चाहा हे � read more >>
है लफ्ज नहीं वो पास मेरे, किन शब्दों में तेरा गुणगान करूं। हे मात तुम्हारी महिमा का, कैसे मैं बखान करूं।। असमंजस में पड़ा मैं मॉ, कि� read more >>
लिया जन्म ज़ब सतयुग मे तो सीता का रूप बन गई हुई दीवानी भोले की ज़ब गोरा माता स्वरुप बन गई, एक नारी थी मीरा एक थी राधा दोनों ही प्यार का गीत read more >>
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