आज के दिन को हम मातृ दिवस के रूप में मनाते है ताकि हमें जन्म देने वाली माता को सम्मान दे सकें, हर कोई अपनी माता से प्यार करता है हमारी संस read more >>
पसीने की क़ीमत, किसने आंकी?
हाथ कुदाली, सिर पर परात, दिखती श्रम की झांकी।
पसीने से ही, धरती का दामन पसीजता है।
चोटी से एड़ी का पसीना, धरा � read more >>
बस अब गीत नहीं लिखने हैं-
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- एक गीत आपकी समीक्षार्थ-
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