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नयनों की सीमा रहे-मिले खुदबखुद प्यार
दोहा छंद नयनों की सीमा रहे,मिले खुदबखुद प्यार। करते तब इजहार भी,फिर होता स्वीकार।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीप
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राधा माधव एक हैं-कभी नहीं ये अन्य
दोहा छंद राधा माधव एक हैं, कभी नहीं ये अन्य। एक जान दो तन रहे, जो करते हैं धन्य।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(दे
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हर मुश्किल आसान हो-सदा करें जब यत्न
दोहा छंद हर मुश्किल आसान हो,सदा करें जब यत्न। खुशियाँ जीवन में रहे, लगे परिवार रत्न।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्त�
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मौसम-हमें भींगाने आया है
बेकरार हुआ मौसम एकरार करने आया हम खुशनशीव है,वो हमें भींगाने आया है काली घांटा छा रही बादल हवाओ ने दौडाया कहीं पडती छोटी बुँदे जमीं
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धरती ने धारण किए-हीरा पन्ना रत्न
(दोहा छंद) धरती ने धारण किए, हीरा पन्ना रत्न। सर्व खनिज से पूर्ण हैं,पाने को कर यत्न।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्ती�
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रहें साफ दृढ़ वास्तविक-जिएं न्याय के साथ
(दोहा छंद) रहें साफ दृढ़ वास्तविक, जिएं न्याय के साथ। कर खंडन अन्याय का, लें यश अपने हाथ।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह ✍🏼 जिला:_सम�
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समय बड़ा दृढ़ है गुरू-देय तजुर्बा खास
(दोहा छंद) समय बड़ा दृढ़ है गुरू, देय तजुर्बा खास। बढ़े ज्ञान की धार तब,लिखता हूं इतिहास।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_सम�
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शिक्षा का सम्मान हो-सबको हो यह ध्यान
दोहा छंद शिक्षा का सम्मान हो,सबको हो यह ध्यान। घर घर शिक्षित तब बने, हो उन्नत विज्ञान।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस�
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एक सूत्र में बंधकर-करिए कार्य महान
(दोहा छंद) एक सूत्र में बंध कर, करिए कार्य महान। सदा करें जग का भला, बने रहें इंसान।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपु�
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सुनकर मेरे शेर को- दे ताली सब लोग
दोहा छंद सुनकर मेरे शेर को, दे ताली सब लोग। हसी खुशी में झूमते,कानों से कर भोग।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(द�
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अड़चन बिन जिन्दगी नहीं कामयाब होंगें सदा
(दोहा छंद) अड़चन बिन जिदगी नहीं, करें सामना आप। कामयाब होंगें सदा, मिले नहीं संताप।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीप
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सच कहना अपराध है - यह तो गहरा पाप
(दोहा छंद) सच कहना अपराध है, यह तो गहरा पाप। हम सब अटल विरोध कर, करूं सत्य का जाप।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(द�
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