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अच्छे कर्म पर कविता-हार कर हालात से न हार होना चाहिए
हार कर हालात से,न हार होना चाहिए हार कर हालात से,न हार होना चाहिए कंटकों से पथ भरा,स्वीकार होना चाहिए क्या करेगी आंधियां,तुफान भी हो
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तीर निशाने पर लगा-जगा अधिक विश्वास
दोहा छंद तीर निशाने पर लगा,जगा अधिक विश्वास। और किया मैं साधना,पूर्ण हुए सब आस।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(�
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खुशहाली का राज है-रहें व्यस्त जो जीव
दोहा छंद खुशहाली का राज है, रहें व्यस्त जो जीव। रहते हैं वे स्वस्थ भी,साधन मिले अतीव।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्त�
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महिमा तेरी खूब है-जाने सब संसार
दोहा छंद महिमा तेरी खूब है,जाने सब संसार। माँ तेरे उपकार से, जीवन में है प्यार।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(द
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चिड़िया बैठी डाल पर-पुष्प भरे हैं प्यार
दोहा छंद चड़िया बैठी डाल पर, पुष्प भरे हैं प्यार। नव चाहत मन में लिए,निभा रही किरदार।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्त
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भोली सूरत देखकर-उलझन भागा दूर
दोहा छंद भोली सूरत देखकर,उलझन भागा दूर। नयन नयन से मिल गए,मस्ती में मैं चूर।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देव�
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बनता अपना काम जब-रहे दूर सब भेद
दोहा छंद बनता अपना काम जब,रहे दूर सब भेद। सेवा भाव सजीव हो,करूं नहीं तब खेद।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देवड�
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पात पात पीले हुए-गिरते हैं दिन रात
दोहा छंद पात पात पीले हुए,गिरते हैं दिन रात। नव कोपल अब वृक्ष में,लगते हैं अभिजात।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीप�
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दृष्टिकोण को साफ रख-रहें बने दिलदार
दोहा छंद जाना है सब छोड़कर,क्यों करते हो रार। दृष्टिकोण को साफ रख,रहें बने दिलदार।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्ती�
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रखिए अनुपम एकता-सभी करेंगे नाज
दोहा छंद हर मुश्किल आसान हो,अपना ही हो राज। रखिए अनुपम एकता,सभी करेंगे नाज।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देव�
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दौलत सबको चाहिए-तब तो जीवन खास
दोहा छंद दौलत सबको चाहिए,तब तो जीवन खास। अलका मय तब जग लगे,रहे माधुरी पास।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देवड़�
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सबका एक सवाल है-सबकुछ हो अनुकूल
दोहा छंद सबका एक सवाल है,सबकुछ हो अनुकूल। खुशियाँ ही खुशियाँ रहे,जीवन का यह मूल।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✔️ जिला:_समस्तीपुर(
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