वो इश्क़ ही क्या, जो दर्द ना दे
और वो इश्क़ ही क्या जो मुकम्मल हो जाए.....
वो इश्क़ ही क्या, जो आँखो मे आशु ना लाए
और वो इश्क़ ही क्या जो चेह� read more >>
काले-काले बादल , ये चाहत के
दिल पे छा गए ।.......
बदला मौसम ओर
घिरे-घीरे तुम बातो मे आगऐ ।
ऐसे तो थे, आस-पास खिले
गुल हजारों
मगर.......
तुम को पसं� read more >>
(शायरी)
जंगल की वह कहानी आज भी कुछ कहती रहती है,
जहां घूमने जाने पर मंगल ही मंगल लगता था।
न कोई खौफ न कोई डर था हम सब ही संग थे,
मन में मस्त� read more >>
(शायरी)
रेल का वह सफ़र आज भी याद आ रहा है,
सामने मेरे चाँदनी जैसी एक महिला बैठी थी।
वह मुस्काई फिर शबनमी होठों से कुछ कही,
यार सफ़र में क� read more >>