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प्यार-महोब्बत
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प्यार-महोब्बत
मै तेरे आंखो का कोई आंसू नहीं जो फिसल जाऊंगा
मै तेरे आंखो का कोई आंसू नहीं जो फिसल जाऊंगा तेरे बुरे टाइम में साथ छोड़ कर तेरा मैं निकल जाऊंगा करते है मोहब्बत तो उस का फर्ज भी अदा क�
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जिव माझा रंगला तुझ्यात रे
जीव सर्वांना वर लाव प्रेम मात्र माझ्याशिवाय आणखी कुणावर नको करू वेळ सर्वांना दे भावना मात्र माझ्या शिवाय आणखी कुणा जवळ व्यक्त नको क
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गज़ल होली
(★गजल होली★) सुन मित्र हमारि प्यार की कुछ यादें|-2 पढ़ने लिखने में मन नहीं लागे, रात- दिना निंदिया नहीं| फोन लगावे बिजी बतावे, रिचार्ज हम
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दिल से शायरी
गेहराई न पुछो प्यार की के, समंदर से भी गेहरा है प्यार हमारा दिल तो बस इक नजारा है साथी मांगों तो जान भी निसार हमारा।
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कि एहसास कितना है
पंक्षी ही बता सकते हैं, कि आसमान कितना है। मालिक ही बता सकते हैं ,कि कदरदान कितना है। उसने इबादत खुदा से नहीं, अपने तावान से की थी। ये ब�
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खाके जहर मर जाऊं neetesh shakya
हमको रुला करके....... किस-किस को रुलाया है| गैरों से मिलकर के..... हमको ठुकराया है||1|| तुझको पा करके........ एक सपना सजाया था| अपनों को भुला करके........ त�
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गुलाब
ऐ गुलाब तू क्यों अब इन पन्नों में डरा सहमा छुपा हुआ है, वो भी एक जमाना था जब तू मेरी प्रेरणा हुआ करता था।। ✍️प्रदीप सिंह ग्वल्या
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जिंदगी जीने की ...... Neetesh Shakya
जिंदगी जीने की मेरी ख्वाहिश थी, अपने छोड़कर गैरों पर चाहत थी| गैरों के चक्कर में अपनों को भूला बैठे, जब अपनों ने दिया सहारा तब गैर रूला
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फुर्सत
अक्सर वह यह कहा करते हैं, के उनको इक पल की भी फुर्सत नहीं पर जाने क्यों हमें यह लगता है के हमसे उनको कोई मतलब ही नहीं।
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मेहमान वनके आए थे कभी
मेहमान वनके आए थे कभी अब याद वनके ही रह गये हो, मिलों दूर के ओ रहने वाले तुम अब ख्वाब वनके ही रह गये हो।
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क्यों नाराज़ रहते हो
क्यों नाराज़ रहते हो क्यों नहीं कुछ कहते हो..... हमें भी दर्द देते क्यों खुद भी दर्द सहते हो....... तुम्हें क्या पता जब महीनों तुमसे बात नही
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जादूच असेल तीचात काही
जादूच असेल तीचात काही , ती नेहमीच असते मझ्यात काही. रात्री उष्याला ही तीच जाणवते, माझ्या स्वप्नात हि तिच वावरते. मी तर स्वपवल सर्व काह
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