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प्यार-महोब्बत
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प्यार-महोब्बत
Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
जो दोस्त मेरी बिस्तर पर बिन बुलाए आ जाते थे आज बही दोस्त को मेरी मैयत पर मिट्टी देने के लिए ऐलान कर के बोलानी पड़ रही है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
क्यों मोहब्बत खत्म कर के जहन्नुमी बनना चाहते हो,क्योंकि मोहब्बत के बिना जन्नत भी हासिल नहीं होती है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
जो दोस्त तुम्हें पहचान ने से भी इंकार कर रहे है कल बही दोस्त तुम्हारे काबिलियत को देख कर तुम्हारे नाम से अपनी पहचान बताएंगे।।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
तुम तो बहुत खुशी मना रहे थे अचानक तुम्हारी खुशी पर पैबंद क्यों लग गया जीना नहीं चाहते या मौत की डर सता रही है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
अब कोई किसी का दोस्त नही रहा क्योंकि उन्हें मेरी चाहतों से ज्यादा मेरी जरूरत से मोहब्बत हो गई है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
सब के मन में स्वार्थ भरा हुआ है अब मोहब्बत मिल भी जाए तो वफा कौन करेगा।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
इज्जत को भी पैसे के जैसा तरबियत दो शाहब,क्योंकि इज्जत और पैसा दोनो को कमाया जाता है खरीदा नही जाता।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
आज जो हमे बेकार समझ रहे है कल बही लोग मेरी काबिलियत पर ताली मार कर मेरी पहचान बताएंगे।
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एकावली छंद "मनमीत"
किसी से, दिल लगा। रह गया, मैं ठगा।। हृदय में, खिल गयी। कोंपली, इक नयी।। मिला जब, मनमीत। जगी है, यह प्रीत।। आ गया, बदलाव। उत्तंग, है चाव।।
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Thagi
हमारे प्यार में आखिरकार ठगी तो होनी ही थी, तुमने अपने माँ - बाप को ठगा था , मैनें अपने.
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फटी चप्पल
अपराजिता घड़ी की अलार्म से हड़बड़ा कर उठती देखती 7:00 बज गई वह कहती मैं इतने देर तक सोते रही रात में मेरा बेटा संजय ने मेरी पैर की मालिश कर
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
ये दुनिया बड़ी जालिम है यहां सच बोलने वाले को सूली पर चढ़ा दिया जाता है,लेकिन झूठ बोलने वाले को सम्मानित किया जाता है।
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