मेरे पुत्र कार्तिक बंसल को समर्पित मेरी यह रचना
कविता = ( कल की कहानी )
तुझमें अपना बचपन देखा !
तुझमें अपनी जवानी !!
तुझमें गुजरा कल है द� read more >>
बडे ,असान से शब्दों मे ' उसने कहा -
"जरा पास तो बेठौ "
ओर
"आज कल "क्या करते हो ?
फिर
"एक टक निगाहो से देखने लगी मुझे "
ओर सन्नाट� read more >>
दुनियाँ ये चाहे,
जाने न जाने
हम को तेरी दीवानगी से
अब नहीं उभरना है !
.........
नशा तेरी मुहब्बत का ही करना है !
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रहके तेरा दिवाने ,
ह� read more >>
उनकी हर बातो का जादू ,अब तक हो रहा है
कोई तो होगा वजह, जो दिल से न उतर रहा है
तू ही बता ऐ जिन्दगी, क्या मोर लेगी,
उनकी वफा मे दिल, अब भी मचल र� read more >>