मिठ्ठी-मिठ्ठी .कर बाते
गर्म ,साँसो से ,दिल जल रहा है।
ढण्डी-ढण्डी बूंद से , ओहो.. हो....
जिस्म पिघल रहा है।
रिम-झम .रिम-झम ,
........सावन .........
बरस र read more >>
(मुक्तक छंद)
मस्त कशिश में महक है,आकर्षण भी खूब।
पास चले आते सभी, लगती है महबूब।
गजब श्रृंगार में रहे, करती दिल पर राज_
कायल उसका है सभी, � read more >>