Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें
है तजुर्बा हमें भी तुम्हें आकने का तुमने हमे फूल सा कैसे समझ लिया। हमने रात चांद नही देखा कोई सपना नही देखा। दिन के उजालों से दूर रही � read more >>
कविता का शीर्षक- "शिक्षक ज्ञान का महाआगार" ज्ञान-विज्ञान का महासागर है, गुरु नूतन पंथ का अन्वेषी। तिमिर में प्रभा पुंज दिखाकर, शिक read more >>
State bank of india नहीं बताता आदमी ने केे कमाया समसान आली भीड़ बताया कर read more >>
शिक्षक-दिवस पर विशेषः सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारत के दूसरे राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक शिक्षक थे। वे शिक्षक रहते हुए देश के � read more >>
पत्थर को भी बोलने पर मजबूर कर दू, पेड़ को छू कर भी उसका दर्द दूर कर दू. ऐसा हुनर दिया है मेरे राम ने, कि घमण्डी को देखकर भी उसका घमण्ड चुर कर � read more >>
लौहा हूँ मैं अभी मुझे सोना बनकर दिखाना है, इन पर्वतों की अकड तोड़कर मुझे रास्ता बनाना है, सपनो को अब देखा है तो पूरा करके दिखाना है, अपने read more >>
"तमन्ना" से घिरी हुई है "जिंदगी हम सबकी".. "भविष्य" की फिक्र से बंधी हुई है जिंदगी हम सबकी... यूं तो जिंदगी की कहानी है पल भर की... इन read more >>
तू दौड़ में अव्वल आए ये जरूरी नहीं, तू सबको पीछे छोड़ दे ये भी ज़रूरी नहीं। ज़रूरी है तेरा दौड़ में शामिल होना, ज़रूरी है ते� read more >>
!! कलम में बहुत ताकत होता हैं जनाब हर बुरे चेहरे को कर देता हैं बेनकाब !! read more >>
Diwsa-diwas badlat ahe.... PAISHYACHYA NANDAT talwalat ahe....... Adi nati apulkichi-adi nati premachi..... Adi nati sukhachi-adi nati dukhachi..... Ata matr PAISHYACHYA NANDAT talwatl ahe...... Adi manus manus manuski japaycha.... Tewha to apulkik asaycha....... Ata matr manus.. PAISHYACHYA NANDAT talwalat ahe... Adi gogat asaycha ap read more >>
ये बातें और रो रो कर नयन से जल बहाया है स्वयं गिर गिर के लोगों को मग़र हमने हँसाया है।। ये रस्ता जा रहा किस ओर हमने पूँछ कर देखा गए कर पा read more >>
रात को अकेले में ये विचार करता हूँ क्या मैं आज बचपन के उन ही बंदरों सा हूँ।। रोज़ खेलते, कूदते और साथ पिटते थे दूध से बनी रबड़ी पे दो ह� read more >>
Join Us: