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,,कुछ पुरानी यादें ,,
जिंदगी की किताब पलटी तो कुछ पन्ने गायब थे , सोंचा जोड़ दूँगा जहाँ के पन्ने रिक्त थे , लेकिन मजबूरी ये थी वो खुशियों गमों के मामलों में सख�
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प्रकृति के पंचांग में
प्रकृति के पंचांग में, शरद ऋतु है ख़ास। शुरू होते ही लगाते, अपने-अपने कयास। सजने- संवरने बैठती, लगते कार्तिक मास। धीरे-धीरे खुदरंग मे�
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सोच
किसी की पहचान उसकी सोच से होती है।। 2।। जिसकी नियत सही उसको जन्नत मिलती है।
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ये कुछ शब्द नहीं, मेरी भावनाएं हैं
ये कुछ शब्द नहीं, मेरी भावनाएं हैं। यह मन में उठती गिरती,लहरों भाँती होती हैं। उकेर देती कभी कभी, गहरी मन की मलाल को। कभी-कभी प्रसन्न क�
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चांद
आज का चांद हैं इतना खूबसूरत, खूबसूरती नजर नहीं आ रही इधर उधर, क्या उसने चुराई हैं तेरी खूबसूरती, जो तू इतरा रही इधर उधर।
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बातें
उल जुनून की बातें हमसे ना होगी, हम तो हैं वह राहगीर, जिसका आगे बढ़ना ही फितरत होगी।
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जीने के लिए लड़ना होगा
घाब भी अपना दा ओ भी अपना जो दिया वो हाथ भी अपना ! हवा के रुख मोड़ दो या नव के दिशा बदल दो जीने के लिए लड़ना होगा या फिर जीना छोड़ना होगा !! ए
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मुलाकात होती
मुलाकात होती तू होती तो कुछ बात होती नजरों से नजरों की मुलाकात होती ! रूह रूह से मिलता हमारी मोहब्बत साकार होती !! तू होती तो हमारा �
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रात के तन्हाई में
रात के तन्हाई में आश्मान में चाँद तारे और सितारें जग मग जग मग टीम टीम करता जुगनू बहु तेरे! मदहोशी में मदहोश अलवेला अल्हड मौसम वसंत�
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अकड़
किस बात कि अकड़ हैं जो इतना तू अकड़ती हैं! शीशे का तेरा बदन हाथ लगे तो टूट जाएं किस बात की रोष हैं जो इतना तू धधकती हैं!! मैंने तुम को दे�
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आधुनिक संसार हैं
समाज के जंजीर में बंधा वेडियों में चुपचाप जकड़ा न टूटता न तोड़ पाता समाज के मिथ्या इजाद ! सत्य पे असत्य का बोल बाला जबरजस्त हैं टुकड़ो
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जो सुकून दे
जो सुकून दे बेफिक्र हैं इस लिए दर्पण सा वेहबार रखते हैं फ़िक्र वो करे जो चेहरे दो चार रखते हैं! जो सुकून दे मन को वो काम करते हैं डरे �
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