विध्यार्थी जीवन की सत्यता आज बताते है ।
पढाई के लिए हम घर छोड़ जाते है ।
कल जो नखरे दिखलाते थे वो आज चुप रह जाते है ।
खाते ते जो कल माँ के � read more >>
उम्र तेरा आठ का,
चेहरा लग रहा साठ का 2..
आंखों की वो चमक कहां?
और होठों की मुस्कान गई ।
पापा की घुड़सवारी,
और गांव की वो यारी।
बचपन! उदास � read more >>
एक स्कूल की एक ही क्लास में पढ़ने वाले काफ़ी बच्चे थे । उनमें दो दोस्त थे, उनमें से एक था बलविंदर (बल्ली) जो पढ़ाई में बहुत होशियार था हर � read more >>
पेड़ों का जीवन जैसे
मानव का जीवन ‌।
जब पेड़ों से पते
गिरने लगते हैं, तो
वह धिरे-धिरे अपने
वृद्धा अवस्था में
आने लगता है ।
और उनकी मृत� read more >>