मैं जब चौदह साल का था तब मैं एक अनजान व्यक्ति से मिला मैं नहीं जानता था कि वह कौन है और न ही वह मुझे जानता था
हम दोनों विधालय साथ जाने लगे read more >>
उड़ने दो उन्हें खुले आसमान में फिर लौट कर वे ज़माने नहीं आते |जब माँ की ऊँगली पकड़ कर चलते होवे बहाने जीवन में फिर कभी नहीं आते |जब पापा के � read more >>
जब हम सफर पर निकले तो पता चला दुनिया में कई और भी हमसफर की तलाश में है ।
शराबी से पूछा तो पता चला जीवन का सार शराब में है ।
वैरागी के पास ग� read more >>
*छत्तीसगढ़ी प्रतीकात्मक बालगीत*
*1- ( अटकन )*
अर्थ-
जीर्ण शरीर हुआ जीव जब भोजन उचित रूप से निगल तक नहीँ पाता अटकने लगता है--
*2- ( बटकन )*
अर्थ-
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