मत दिखा मुझे ये तेरी शोहरत के पन्ने,
उन्ही पन्नो की किताब हूँ मैं,
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तू सूंघ रही है जिन महुआ के फूलो को,
उन्ही से बनी शराब हूँ मैं,
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और तुझ read more >>
क्यू रोता है ऐ-नीर, यहां पंख निकलते ही परिंदे उड़ान भरते है,
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भनक लगी है तेरी खनक की उन्हें, तभी वे दरिंदे कान भरते है,
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और ये जो रिश्तो के � read more >>
ऐ- चांद तू सोच कितना खुशनशीब है,
आसमां में रहकर भी धरा के करीब है,
मैं लिख रहा हूँ
मेरे कल्पित विचार
मेरी लेखनी से,
तुझ से ही करवाचौथ,
तु� read more >>
स्वरचित रचना- ए हिन्दुस्तान है,.............।
संदर्भ---राजनीतिक व्यंग
ए हिन्दुस्तान है,
जहां न्याय टिका सबूतों पर,
सबूत लाओ,
तभी सरकार यहां स read more >>
स्वरचित रचना---जिंदगी न सही,................!
संदर्भ---गम ए जुदाई
जिंदगी न सही, तू मौत ही बनकर आ जा।
आ मगर‌ आ,तू इक बार तड़प कर आ जा
आज बादल उमड़ पड़ read more >>