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जीवन सुख दुख -मुक्तक छंद
मस्ती में रहना मेरा काम है। यारी करना मेरा शुभ काम है। जीवन सुख दुख का है अनुपम मेल_ जिन्दगी जीना इसी का नाम है। (स्वरचित मौलिक) संदीप �
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प्यार की एक बगिया - मुक्तक छंद
प्यार की एक बगिया बनाया हूं, ज़िंदगी एक मिशाल बनाया हूं। भीड़ भरे इस संसार में गम क्यों_ गम को अजी हथियार बनाया हूं। (स्वरचित मौलिक) स�
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छलियों से बचकर रहें
छलियों से बचकर रहें, कर देगा नुकसान। होगी बदनामी अधिक, तन मन हो बेजान।। छलियों से बचकर रहें,खुद पर हो विश्वास। दुनिया को हो गर्व तब, सभ
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प्यार की एक बगिया
प्यार की एक बगिया बनाया हूं, ज़िंदगी एक मिशाल बनाया हूं। भीड़ भरे इस दुनिया में गम क्यों, गम को ही मैं हथियार बनाया हूं। देखो एक पक्ष
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संकट में जो साथ दे उनसे रखिए चाह
सुख के साथी सैकड़ों,करते रहते वाह। खाने पीने में रहे,अन्दर रखते डाह। ऐसों से हट कर रहें, फूलों सा हो रात_ संकट में जो साथ दे,उनसे रखिए च�
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सुख के साथी सैकड़ों
सुख के साथी सैकड़ों,करते रहते वाह। खाने पीने में रहे,अन्दर रखते डाह।। सुख के साथी सैकड़ों,जैसे हो दस्तूर। दुख में ही पहचान हो,दिखे नह
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सुख के साथी - मुक्तक छंद
करते रहते वाह,सैकड़ों सुख के साथी। अन्दर रखते डाह,दांत रखते सम हाथी। दुख में दे जो साथ,वही सच्चे हमराही_ यही मनुज पहचान,बनो कभी न मनमाथ
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हमसफर मैं तेरे लिए - मुक्तक छंद
हमसफर मैं तेरे लिए, तूं मेरा है श्वास। जुदा जुदा न कभी रहूं,सदा रहूं हम पास। दीया बाती बन यहां,फैलाऊं नित ज्योति_ सबके आऊँ काम हम,बना रह�
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असफलताओ से तू क्यू हार मान रहा
असफलताओं से तो क्यूं हार मान रहा जब संघर्ष ही जीवन है ,तू जान रहा याद रख जो रख हौसला आगे बढ़ता गया जीवन में सफल वही इंसान रहा तो फिर त�
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मैं हूं एक किताब
याराना और समय चाहिए बस आपका , नहीं करना मुझे कोई खानदानी हिसाब जिन्दगियां बदल जाती है मुझसे , मैं हूं एक किताब , हूं एक किताब
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दिल से शायरी
नादानी कुछ ऐसी थी हमारी के दिल को हम वहलाते रहे, काम सायद कुछ भी न था उस वक्त तभी तो दिल का दर्द वढाते रहे, प्यार था बस एक हवा का झोका झो�
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आँखों की नमी
"नमी" "मेरे पास अल्फ़ाज नहीं हैं,उसकी मोहब्बत् को बयाँ करने के लिये मगर आँखों की नमी,सब कुछ बयाँ कर रही है,उसकी मोहब्बत् के बारे में"
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