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मेरा अच्छा होना दूसरों के लिया तो अच्छा था
मेरा अच्छा होना दूसरों के लिया तो अच्छा था। पर मेरे ख़ुद के लिये अच्छा होना बड़ा महँगा पड़ा। सचिन कुमार सोनकर
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महफिल में चर्चे तुम्हारे नाम के
चर्चा चली महफिल में तुम्हारे नाम की ! !मेरे होठों पर मुस्कान के साथ आंसू आ ही गए! तुम्हारे साथ गुजारे कुछ, पल याद आ ही गई, क्या खोया? क�
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दिल के दीपक को बचाना है जरूर
जब जिंदगी में हर तरफ रास्ते हो बंद ,चारों तरफ फैली हो अंधियारी ,मुश्किल पलों में जब मुस्कुराने का दिल न करें l मैं !तो कहती हूं उन मुश्�
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मां बाप के सपने
झुटी वादे प्यार में, फस जायेगे आपके चक्कर में, पूरी जिंदगी निकल जायेगी, हवालात के अंदर में, मां बाप की सपने,अधूरे ही रह जायेगे, मैं नही
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झुटी मोहब्बत
तू करवट बदल बदल कर, मुझे झकझोर न कर तेरी झुटी मोहब्बत में, मैं आने वाला नही मुझे अपनी ओर आकर्षित न कर
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चाह है मंज़ील, चाह ग्मन,
चाह है मंज़ील, चाह ग्मन, और चाह ही पथ का संगम है! चाह प्रभा का नुत्तन दृष्य, कर रही डगर हर पावन है!! चाह है भक्ती, चाह कर�
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भूल सकता है।
मुहोबत लिख कर खुदा । भूल सकता है। बेशक , पर इंसान प्यार कर के नहीं भूल सकता ।
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होली की सितम
फिर आई दर्द लेके होली, सारे गुलाल उड़ रहे। उनकी एक याद है कि, जो मलाल की जड़ रहे।। बेचैनियाँ रंगों की मानिंद, जीवन में एक फुहार की तर�
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हर मंजर बदल गये।
हर तरफ है धुँआ, अचानक एक पल में क्या हुआ? सामने आँखों के , हर मंजर बदल गए। आँखों में एक पहरा, जख्म देख जरा गहरा। दिवानों के कत्ल में स�
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आशा उम्मीद हूं
स्वप्न भी हूं !उम्मीद भी हूं! आशाओं की! एक किरण भी !हूं मैं !मैं तुम्हारी जिंदगी की! शाम भी हूं !हर एक सुबह होती रही मुझसे यहां!
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बादलों में छुप कर
बादलों में छुप छुप कर चांद ! मुझे सपने दिखाता क्यों है? चांद की चांदनी! दूर-दूर तक बिखर कर मेरे सपनों को ! जगाती क्यों है ? निराशा के बाद�
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कुछ सिकवे है मुझे तुमसे कुछ सिकायते है तेरी
कुछ सिकवे है मुझे तुमसे कुछ सिकायते है तेरी मै चाहता रहा हर घड़ी तुमको और तुम्हे मेरी भनक भी न लगी जब तुम अपने घर गलियों से निकलते थे ह�
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