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त्याग रहो आलस्य को-धीरे धीरे हो रहा,ऋतु में खास सुधार
धीरे धीरे हो रहा,ऋतु में खास सुधार। त्याग रहो आलस्य को, हो अनुपम किरदार।। हो अनुपम किरदार,करे संसार प्रसंशा। बढ़ते आगे आप,पूर्ण होगी
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धीरे धीरे हो रहा-अंशुमान अब गर्म
धीरे धीरे हो रहा, अंशुमान अब गर्म। भक्ति भाव में सब रहें,छोड़ें कभी न धर्म।। धीरे धीरे हो रहा,ऋतु में खास सुधार। त्याग रहो आलस्य को, ह�
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अनुपम हो आगाज-लेखन ऐसा कीजिए
लेखन ऐसा कीजिए,अनुपम हो आगाज। करे नाश पाखंड को,लोगों की आवाज।। लोगों की आवाज,करे भारत को आगे। प्यारा अपना देश,रहे दुख गम सब भागे।। जन �
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ना जाने किसकी तलाश है
1तुम्हारी हसीं चेहरे को देखकर हर जवां दिल धड़कता होगा। तुम जब आईना देखती होगी,कमबख्त! आईना भी तुम्हें पसन्द करता होगा। 2माना तुम्हारा
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नन्ही सी मुस्कान से मन को मेरे रीछाती
छोटे- छोटे कदमों से, सारे आँगन को महकती । कभी ठिटोली करके तो कभी रूठ वो जाती। नन्ही सी मुस्कान से, मन को मेरे रीछाती। उसके चंचल स्�
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जब-जब देखता हूँ तुम्हें
तुम्हें पता है? जब-जब देखता हूँ तुम्हें देखता हूँ एक उम्मीद के साथ कदाचित् अब हो जाए मुझे प्रेम मगर; तुमसे नहीं; स्वयं से! तुमसे प्रे
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वक़्त और हालात इन्शान को मजबूर बना देते है
वक़्त और हालात इन्शान को मजबूर बना देते है वर्ना नेकियों की किताब यूं खाली न होती । और तादाते इश्क़ खुदा की इन्तेहा मत पूंछो वर्ना वलि�
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भूखे भेड़िये हैं वो
भूखे भेड़िये हैं वो, खाने भी आयेंगे तुमको पेट जब भर जायेगा दुख जताने भी आयेंगे तुमको दोगला चरित्र है उनका विश्वास मे मत आना उनकी हद स�
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चिड़िया के घर में
पंछी का संदेसा एक दिन मैं शाम को जब बाहर घूम रहा था, तभी मेरी नजर खेत के नीम पर बैठी एक चिड़िया पर गई । मैंने सोचा चलो एक इसका तस्वीर लेत�
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मां ममता परिभाषा बदल गई
पिघल ममता मोम, रम स्वामिभक्ति रगों में घुल गई। निज सुत शोणित से, मां ममता परिभाषा बदल गई। चुटकी भर सैनिक, फ़रेबी फ़ौज से भिड़ गए। यहां
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बचपन की उन यादों में हम
आंख मिचोली का खेल खेले हैं हम । गांव की उन गलियों में घूमे हैं हम ।। गले में हाथ डाल साथ घूमे हैं हम । नीम की उस डाली पे खेले है हम ।। द
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उम्र और ज़िंदगी का तक़ाज़ा देखो
यह उम्र और- ज़िंदगी का तक़ाज़ा देखो अपनें किनारा- कर लें अपने को, समझा लो उम्र हो गई इससे पहले जो था- वह ज़िंदगी गुज़ार ली तुमने सि
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