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आज पंक्तिया मेरी जो ये तुम पढ़ते हो
सभी का तहेदिल से आभार... कौन समझाए बेसबब संसार को मैं बखूबी निभाता हूं किरदार को जीतने की नहीं होड़ में शामिल मैं हंस के स्वीकारता ह
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सपनों की परी-एक रात ख्वाब में
एक रात ख्वाब में, मैंने देखा एक परी। आसमाँ में बादलों से, आके जमीं पर उतरी। गुलाबी चेहरा, केश काले, हाथ में पकड़ रखी थी जादू की छड़ी।
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तुम मेरी जिंदगी हो-तुम मेरी बंदगी हो
तुम मेरी जिंदगी हो, । तुम मेरी बंदगी हो।। तुम मेरी आवारगी में, तुम मेरी सादगी में। तुम मेरी नींदों में, तुम मेरी उम्मीदों में। तुम
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फिर से जो तू आये-फिर से जो मस्ती छाए तो
फिर से जो तू आये तो, फिर से जो मस्ती छाए तो, मेरी भूली जिंदगी की तकदीर बदल जाए। आ जा रे साथी, आ जा रे साथी।। उल्फत के मारे है, बड़े बेसहा
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मिलन देखिए तकदीर का -अनजाने मे ही सही
मिलन देखिए ,तकदीर का अनजाने मे ही सही, निगाहों ,से ही हाल पुंछ के, कह दीजिए अब और नहीं । जो ताबीज हिफाजत करता था । मेरी कभी ,तोड़ दीजिए
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दीप सा मन जल रहा है-ताप सब घर
#बहर:_2122 #काफिया:_जल/चल #रदीफ:_रहा है। #मिसरा:_दीप सा मन, जल रहा है। ताप सब घर, जल रहा है। कर्म ही तो, फल रहा है। प्रेम ही अब, हल रहा है। नाम
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मन मंदिर महका दो-मेरा बचपन लौटा दो
मन मंदिर महका दो, मेरा बचपन लौटा दो! शामे जिंदगी की वो यादें, मैने देखा आप भी जानो! दमक रहा ऐसे मानो , सोने सा बचपना फिक्र ! फिक्र नही क�
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कहानी एक स्त्री के आत्मसम्मान की-एक स्त्री होने के लिए
कहानी एक स्त्री के आत्मसम्मान की एक स्त्री वह औरत है जिसे बाकायदा हर महीने माहवारी आती है। वहीं माहवारी जिसको स्त्री अपने 11 साल के उम�
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सिर्फ याद है मुझे उसका ठिकाना
दिल में इस तरह से बसा है! ये दिल-ए-हाल है मेरा- भूल गया मैं अपना ठिकाना, सिर्फ याद है मुझे उसका ठिकाना दिल में इस तरह से बसा है!! -मोती
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बंद हैं ये पलकें जानूं से गुफ्तगू हो रही
मेरे कर्मों- नसीब का हाल-ए-मंजर है बंद हैं ये पलकें! जानूं से गुफ्तगू- हो रही है दिल जाग रहा है!! -मोती
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सुन-ए-भाई हम सब की यह कहानी
यह हाथ उसकी- इबादत को उठते हैं यह आंख- दर्शन को बेताब हैं ये जुबान उसके- गुणगान करते नहीं थकते यह दिल- उसी के नाम धड़कते हैं हम ईश्व�
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अजीब सी मंज़र मेरे क़रीब है
अजीब सी मंज़र मेरे क़रीब है! मिट्टी- चल रही है मिट्टी- बोल रही है मिट्टी- के रिश्ते-नाते हैं मिट्टी से- एक गड़बड़ी हो गई जिसने यह- चमत
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