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आधे से ज्यादा लोग भीड़ के रास्ते से चलते है
आधे से ज्यादा लोग भीड़ के रास्ते से चलते है जिसकी उनकी ज़िंदगी लोगो की तरह ही होती है . लेकिन कुछ लोग ही अपना रास्ता खुद ढूंढते है और उसी र�
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इंसान को कभी अपने पे घमंड नहीं होना चाहिए
इंसान को कभी अपने पे घमंड नहीं होना चाहिए की में ही हु सब कुछ क्यों की इससे उनकी ज़िंदगी की ख़ुशी छीन जाती है और इंसान दुखी ही रहेता है कभ�
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आप कितना जीते हो ये मायने बिलकुल भी नहीं करता है
आप कितना जीते हो ये मायने बिलकुल भी नहीं करता है लेकिन आप कैसे ज़िंदगी को जीते हो ये मायने बिलकुल करता है . इसीलिए ज़िंदगी को खुल के जीना
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आज के समय में लोग आप को आगे बढ़ते हुए देखना चाहते है
आज के समय में लोग आप को आगे बढ़ते हुए देखना चाहते है लेकिन उनसे आगे देखना बिलकुल भी नहीं चाहते है और ये आज के समय की कठोर सच्चाई है इसील�
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असफलता इंसान को तोड़ देती है
असफलता इंसान को तोड़ देती है , बिखर देती है लेकिन वोही असफलता इंसान को पहले से भी ज्यादा शक्तिशाली बनाती है इसीलिए आज आप की जिंदगी में
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आसान है कोई भी इंसान आगे बढ़ सकता है
आसान है कोई भी इंसान आगे बढ़ सकता है बस उसको खुद पे भरोशा होना बेहद ही जरूरी है क्यों की आत्मविश्वास के साथ ही इंसान अपनी ज़िंदगी म में क�
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इबादत-मै अंधेरे मे बैठा था इबादत करने
मै अंधेरे मे बैठा था इबादत करने , चराग तूने जलाकर मुझे धोखा दिया । __ शिव किशोर
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सोंच कर देखो (पक्षी पर कविता)
सोंच कर देखो ( पक्षी पर कविता) किसी आशियाना को कोई कब तक बनाएगा, जब उखाड़ फेंकने पर कोई तुला हो, बाग बगीचा वन उपवन को छिन्न-भिन्न कर हम
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मै टूट चुका हूं भीतर से पुरी तरह
आज 8 साल हो जाएंगे तुझको मुझे छोड़ कर गए तुझे क्या मालूम है तेरे बिना मेरे ये दिन कैसे गए दुनियां को सिर्फ मुस्कुराहट ही दिखती है हर बा�
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संभाल ले बाबा कहीं हो ना जाए देरी
बाबा ज़िंदगी उलझ रही है मेरी देख ना क्यों ढील दे रहें हो बाबा कहीं पतंग की तरह कट ना जाए ये सांसें मेरी दुनियां कोशिश कर रही है गिराने �
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जीव अपने अंतर्मन को जानकर
जीव अपने- अंतर्मन को जान कर,, अपने नाशवान रूप- से छुटकारा पा लेता है,, और वह पूर्णता- की ओर बढ़ने लगता है....!!!! -मोती
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परमानंद आपका आंतरिक अस्तित्व में हमेशा मौजूद है
बाह्य परिस्थिति- चाहे जितना विपरीत हो,, परमानंद- आपका आंतरिक, अस्तित्व में हमेशा मौजूद है...!!!! -मोती
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