गुज़र रहे थे-
वक्त काल बनकर,,
सोचा था-
कुछ ग़म बांट लूं रिश्तों में,,
क़रीब गया-
वह तो दुखों के,
पहाड़ तले थे-मैं चोटी में था....!!!!
-मोती read more >>
अवसर वादी हो गए, आज अधिकतर लोग।
अपना ही हैं देखते, खूब मिले जो भोग।।
अवसर वादी हो गए, सब नेता गण आज।
भरे तिजोरी खूब खुद, करे न विकास काज।� read more >>
सवाल........,?
पुछती. कमजोर निगाहे.
आखिर ,क्यों ..... ?
ज़िन्दगी को योही ,
ये दर्द देना था।
क्या ,सूरज की तपन मे
हमने पसीना नही बहाया।
सघर्ष तो ,� read more >>