मेरी एक दोस्त हैं जो इन दिनों ससुराल में है ,जो फूलों को छोटेपन से ही सींच -सींच कर बड़ा करती हैं ,और जब उनके खिलने की बारी आती है, तब तक उनक� read more >>
पिता पर ही क्यों लिखूं...मैं तो माँ पर भी लिखूंगी..क्योंकि मुझे लगता है वो,दोनों एक ही है...
वो अपनी हर परेशानियों को अपनी मुस्कान में छुप� read more >>
अपनी दुनियाँ मे, कोई ,कैसे ?
गुम ,हो गया ।
खुला था ! आसमाँ , देखते-दखते .वो सितारों को सो गया।
अपनी दुनियाँ...........
जाने कैसे ? बदला वक्त ज़िन� read more >>