एक प्यारी सी बच्ची
चालीस - बयालीस साल की घरेलू स्त्री थी सीमा जी का भरापूरा परिवार था । धन - धान्य की कोई कमी नहीं थी । सुधा भी ख़ुश ही थी read more >>
बुढ़ापे का सहारा
सीमा... आखिर बात क्या है कल से देख रहा हूं तुम बार - बार छत पर जाती हो ... कई बार छत से चढ़ते - उतरते हुए देखकर आखिरकार दिनेश read more >>
एक शहर मे सेठ रहता था ! सेठ कभी भी अपनी धन सम्पती पर घमण्ड न किया ! वह एक समाजिक विकास करने के लिए हमेशा तत्पर रहता था !किसी के भी के दुख दर्� read more >>
झर-झर बरसे नयन हमारे ज्यूँ झर-झर बदरा बरसे रे
पिया मिलन को आतुर अंखियाँ, हाय रे ! कब से तरसे रे
दरद जिया का सह नहिं जाए, सुध बुध तन बिसराई
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" पितृ सम्मान "
रात के दस बज रहे हैं और तुम अभी तक घर नहीं लौटे ... ? कल से तुम्हारा बाहर जाना बंद ... ! !
यह कमरे में धुंंआ किस चीज का है ... ?
सिगर read more >>
अनमोल धरोहर
डैडी... आज आपके रखें नये ड्राइवर ने मेरे साथ बदतमीजी की ... देर शाम लौटी जांहवी ने अपने पापा को बाहर हाल में बैठे हुए देखकर शि� read more >>