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सदा लक्ष्य हो प्रगति का रखता हूं मैं ध्यान
(दोहा छंद) सदा लक्ष्य हो प्रगति का,रखता हूं मैं ध्यान। करता अथक प्रयास मैं, बढ़ता मेरा ज्ञान।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिल�
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नफा और नुकसान का रखिए प्रतिदिन ध्यान
(दोहा छंद) नफा और नुकसान का,रखिए प्रतिदिन ध्यान। कारण को तब जानकर, प्रगति करे इंसान।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्ती�
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सच कहना अपराध है - यह तो गहरा पाप
(दोहा छंद) सच कहना अपराध है, यह तो गहरा पाप। हम सब अटल विरोध कर, करूं सत्य का जाप।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(द�
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बड़े संत सब समाधि में होते हैं जब मस्त-आत्मा प्रभु में लीन हों
दोहा छंद बड़े संत सब समाधि में, होते हैं जब मस्त। आत्मा प्रभु में लीन हों, दोनों ही हों व्यस्त।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 ज�
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गेहूं संग घुन भी फसे-जाता चक्की पीस
दोहा छंद गेहूं संग घुन भी फसे,जाता चक्की पीस। ऐसे से बचकर रहें, बढ़े उम्र तब तीस।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपु�
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विधा विनय विवेक को-सदा करें सम्मान
दोहा छंद विद्या विनय विवेक को, सदा करें सम्मान। मिले आशीष खूब तब, बढ़े नित्य ही ज्ञान।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्
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जीवन गरिमा मय जिएं- मन में नित नव चाह
(दोहा छंद) जीवन गरिमा मय जिएं, मन में नित नव चाह। मद्धिम मत कर जोश को, चलते चल हर राह।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीप�
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पंकज सम मेरे नयन- लब पर है मुस्कान
(दोहा छंद) पंकज सम मेरे नयन, लब पर है मुस्कान। दिल में जगमग प्यार है, सभी लोग हैं शान।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीप
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राम
राम
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कोई साथ देखेगा ये भ्रम मत रखना-किसी पर निर्भर मत रहना
कोई साथ देखेगा ये भ्रम मत रखना, किसी पर निर्भर मत रहना, खुद को बनाना मजबूत, अकेले चलने की हिम्मत रखना।
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खुद पर विश्वास करो-जो करना है आज करो
खुद पर विश्वास करो, जो करना है आज करो, रास्ते खुद बनाना, अपने पैरों पर चलो।
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हम फ़क़ीर-सौदागर हैं सादगी के मोहब्बत के खातिर
हम फ़क़ीर- सौदागर हैं सादगी के मोहब्बत के खातिर ईमान का पाठ पढ़ाते हैं वैसे- शहर का मिज़ाज रंगीन है- बहारें भी हसीन हैं,मन-मुताबिक ह�
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