(दोहा छंद)
कुछ तो काला दाल में, सूरत पर है हर्ष।
बात करें वह गर्व में, फिर भी हो उत्कर्ष।।
कुछ तो काला दाल में,मिलता मुझ से रोज।
करता बात� read more >>
(मुक्तक छंद)
मस्त कशिश में महक है,आकर्षण भी खूब।
पास चले आते सभी, लगती है महबूब।
गजब श्रृंगार में रहे, करती दिल पर राज_
कायल उसका है सभी, � read more >>