कहीं एक खालीपन था, जो भर नहीं पाया,
एक चेहरा अपना–सा था, जो सच में अपना बन नहीं पाया।
सुबह की पहली धूप में भी तेरी ही कमी सी लगी,
भीड़ के ब� read more >>
तू गई तो दिल के शहर में सन्नाटा सा छा गया,
हम मुस्कुराना भी चाहें तो रोना आ गया,
कहते हैं जुदाई वक़्त का इम्तिहान लेती है,
मगर तुझ बिन हर � read more >>
खामोशी भी कुछ कहती है, बस सुनने वाला चाहिए,
हर थकी हुई सांस में, एक उम्मीद वाला चाहिए।
जब रात बहुत गहरी होती है, और अंधेरा डराता है,
तभी क� read more >>